शिव धर्म

शिव धर्म Shiv Dharma जीवन को सार्थक बनाने के लिए , पांच मुख्य पुरुषार्थों

1-शिव धर्म,

2- अर्थ,लक्ष्मी

3- काम

4- मोक्ष सहस्रार

5- शिव प्रेम

ही हैं। इन पांच स्तम्भों पर ही आत्मा बीज रूप में मूलाधार चक्र पर टिकी होती है। प्रथम है

1- शिव धर्म – विजय भाव ऊर्जा , की विजय केवल अन्त मे सत्य की ही होती है। शिव धर्म द्वारा ही बाकी स्तम्भों को ऊर्जा प्राप्त होती है। इस स्तम्भ बीज रूप को ऊर्जा शिव लिंग कुडंलिनी द्वारा प्राप्त होती रहती है। यहीं से मोक्ष कुंडलीनी जागरण ओर सम्पूर्ण विश्व की सिद्धीयों , एवं जीवन आत्मा का विकास आर्थिक विकास का पहला द्वार खुलता है। दुसरा है

2- अर्थ – यानी की धन, सुविधा वगैरह जो शिव धर्म की ऊर्जा से पुरुषार्थ शक्ति द्वारा प्राप्त होता है। यही से शनि बुरे कर्म का दन्ड देता है ओर अच्छे का कर्म का फल , शनि का कार्य स्थल ब्राह्म चक्र मे भी है। वह सूर्य स्थल से भी दन्डीत करता है।

3– काम यह शक्ति धर्म स्थान को बहुत ज्यादा प्रभावित करती है , अधर्म कार्य करने से यहां पर आत्मा का स्तम्भ कमजोर होने लगता है। जीवन काल मे जो हम कार्य करते हैं वह यही से बनने या बिगडते हैं।

४ – मोक्ष – इन तीन स्तम्भो का आधार ही मोक्ष होता है। यह स्तम्भ महा काली , गणेश की ऊर्जा का स्रोत हैं। काली यही से पुरी संसार की आत्माओ की जननी है।

5- शिव शक्ति प्रति प्रेम, निष्ठा ,बिना विश्वास, निस्वार्थ सेवा के सफलता सन्धिग्द होती है.

प्रथम तीन पुरुषार्थ साधनरूप से तथा अंतिम साध्यरूप से व्यवस्थित होता है । मोक्ष परम पुरुषार्थ, अर्थात्‌ जीवन का अंतिम लक्ष्य शिव लीन होना , किंतु वह अकस्मात्‌ अथवा कल्पनामात्र से नहीं प्राप्त हो सकता है। उसके लिए साधना द्वारा क्रमश: जीवन का विकास और परिपक्वता की आवश्यक होती है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारतीय समाजशास्त्रियों ने आश्रम संस्था की व्यवस्था की गई थी। आश्रम वास्तव में जीव का शिक्षणालय अथवा विद्यालय है। ब्रह्मचर्य आश्रम में धर्म का एकांत पालन होता है। ब्रह्मचारी पुष्टशरीर, बलिष्ठबुद्धि, शांतमन, शील, श्रद्धा और विनय के साथ युगों से उपार्जित ज्ञान, शास्त्र, विद्या तथा अनुभव को प्राप्त करता है। सुविनीत और पवित्रात्मा ही मोक्ष मार्ग का पथिक्‌ हो सकता है। गार्हस्थ्य में धर्म पूर्वक अर्थ का उपार्जन तथा काम का सेवन होता है। संसार में अर्थ तथा काम के अर्जन और उपभोग के अनुभव के पश्चात्‌ ही त्याग और संन्यास की भूमिका प्रस्तुत होती है। संयमपूर्वक ग्रहण से, त्याग होता है। वानप्रस्थ तैयार होती है। संन्यास के सभी बंधनों को को शिव धर्म की ऊर्जा द्वारा काट कर , पूर्णत: मोक्षधर्म का पालन होता है। इस प्रकार आश्रम संस्था में जीवन का पूर्ण उदार, किंतु संयमित नियोजन भी हैं। कुन्डलिनी शक्ति इसी चक्र मे साढ़े तीन फेरे लगा कर सुप्त अवस्था मे रहती है। उस की प्राकृतिक अवस्था तो जागृत रहना है परन्तु पाप ग्रस्त होकर वह सुप्त हो जाती है। इसे जाग्रत कर गंगा नाडी से ऊपर चढ़ाना कर शिव मे लीन करना ही मोक्ष होता है। ~~GULERIA SADH GURU ~~

शिव धर्म – शिव शक्ति अमृत
परा ब्राह्म ने सदा शिव का आकार ले कर सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की , ओर ब्राह्मडं को चलाने के लिए , ब्राह्मडं की रक्षा के लिए देव देवी देवताओं की आत्माओ को जन्म दिया शक्ति द्वारा दिया ओर ब्राह्म जी शरीर प्रदान करते हैं ब्राह्म मनिपुर चक्र से ।
ओर सदा शिव शक्ति सहस्रार चक मे समाधि मे बैठे बैठे ही सम्पूर्ण सृष्टि की आत्माओ एवं देवी देवताओं , सम्पूर्ण मानव जाति को जीवित रहने के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं।
याद रखे एक मात्र सदा शिव शक्ति ही जो सम्पूर्ण प्राणियों मे जीवन प्रदान करने मे सक्षम है।
जो मूलाधार से जोड़ती हुई ऊपर के सभी चक्रों से उठ कर सहस्रार चक्र मे समाधि मे बैठे है वही सदा शिव है उसी तरह वह ब्राह्मडं के बीच मे बैठ कर पुरे ब्राह्मडं के रचनाकार भी है ,ओर अन्त भी वही करते हैं।
सिर्फ एक मात्र सदा शिव का स्थान सबसे ऊंचा है वही मोक्ष ऊर्जा का सत्य रूप है प्रकाश है ,कोई भी पाखडं पंथ धर्म गुरू उन तक नही पहुँच पाता है।
वही सभी देवी देवताओं को ऊर्जा देकर सम्पूर्ण सृष्टि को देख भाल करते हैं।
इन्द्र मुलाधार पृथ्वी तत्व – पृथ्वी पर बारिश करता है आनाज, फल सब्जी पैदा होती है। सूर्य देव मनीपुर चक्र स्थान की ऊर्जा से, होते हुए भी आकाश से ,पृथ्वी तत्व को रोशनी ऊर्जा प्रदान करते हैं।
उन की गरमी से स्वाधिष्ठान चक्र से जल वाष्प बन कर आकाश तत्व से बारिश करता है।
जिस से लक्ष्मी प्रसन्न होकर खुशहाली देती है।
( गुलेरिया सद गुरू शिव पूत )

यह सारा सृष्टि का चक्र हमारे ही शरीर मे छिपा हुआ है।
बस जरूरत है इसे सृष्टि चक्र से जोड़ने की
आप का शरीर आप की आत्मा मे छिपी है शिव शक्ति की ऊर्जा का , जिसे आप ने सबसे बड़े देवो के देव महादेव से जोड़ना ही तो है।
आप के देवो देवताओं को शिव से जोड़ना है , अपने परिवार को उस महान शक्ति से जुडना ही है।
आप इसीलिए परेशान है कि आप ने अपने आप को गल्त धारणाओ से जोड़ रक्खा है।
आप पाखडं पंथ , पखंडी गुरूओं से , पखडी मजारों पीर के माया जाल को तोड कर सत्य की पहचान करना है।
सत्य जो शिव है।
सत्य जो आप के भीतर ही छिपा है , उसे शिव की सच्ची ऊर्जा के साथ जोड़ना है।
इस जुड़ने का रास्ता ही शिव धर्म है। जो दुनिया का पहला ओर आखिरी सत्य है।
जिस का न जन्म है न मृत्यु वह है शिव शक्ति , बायां हिस्सा शक्ति दाहिना शिव जो पर ब्राह्म है।
कृष्ण जी जो शिव लिंग जो आत्मा के अन्दर उस को गऊ लोक से दूध की ऊर्जा प्रदान करते हैं।
दुनिया मे कोई भी एेसा धर्म कोई ऐसा पंथ शिव के बिना बन ही नहीं सकता है , क्या कि एकमात्र शिव ही है जो सम्पूर्ण सृष्टि को ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं , सम्पूर्ण विश्व मे उन्हीं के देव देवी देवता राज कर रहे हैं। सम्पूर्ण सृष्टि को शिव ऊर्जा से चला रहे हैं।
दुनिया.के किसी भी धर्म रिलीजन पथं मे ऐसी शक्ति है ही नही ,जो एक तिनका भी दे सके ,क्या की एक तिनका भी सूर्य इन्द्र ओर शिव ऊर्जा से उत्पन्न होता है।
गुलेरिया सद गुरु

🙏

शिव शक्ति शिव धर्म साधु , महात्मा बनने के साथ साथ वीर भी बनें। जैसे हनुमान जी, राम , शिव शक्ति, अन्याय के आगे सिर झुकाना कायरता है। शिव शक्ति कभी कायर हो ही नहीं सकते हैं। अपने आप को अपनी आत्मा शरीर को शिव शक्ति से जोड़ना , अपने परिवार को , दोस्तो को शिव शक्ति से जोड़ना ही, सच्चा धर्म ओर तपस्या है। शिव के बनाये नियमों पर आधारित चलना ही सच्चा धर्म है जो शिव द्वारा संचालित हैं। शिव धर्म दुनिया का पहला सच्चा धर्म है जो शिव शक्ति द्वारा उत्पन्न हुआ है। शिव ही सत्य है। सभी आत्मा देवी देवताओं सभी मानव जीवन जाति शिव लिंग शक्ति द्वारा पैदा होने के कारण शिव शक्ति की सन्तान ही है। परन्तु अलग अलग धर्म जाति ,रीति रिवाज , देश में अलग परिवेश मे पैदा होने के कारण , धर्म भ्रष्ट व्यवस्था के कारण अग्यान में डूबे हुए हैं। शिव शक्ति से जोड़ना ही सच्चा धर्म है। बिना शिव शक्ति के शव शरीर कुछ ज्यादा करने की स्थिति में नहीं होता है। इसलिए शिव शक्ति के द्वारा ही सम्पूर्ण विश्व का कल्याण संभव है।
शिव धर्म शिव स्थान
शिव धर्म गुलेरिया सद्गुगुरु

शिव जी कृष्ण की जीवनी से पता चलाता हैं कि , वह हमेशा अधर्म नास्तिकों से लड़ते रहे तथा शिव धर्म स्थापना के लड़ने का आदेश दिया गया जो आक्रमणकारी थे,
अत्याचारी थे। यह लड़ार्इ अपने बचाव के लिए थी। देखें शिव पुराण रामायण गीता :
http://krishna-dharma.wap-ka.com/
और (ऐ अर्जुन याद करो) जब अधर्म कौरव तुम्हारे बारे में चाल चल रहे थे कि तुमको कैद कर दें या जान से मार डालें , देश से निकाल दिया तो ,इधर से वे चाल चल रहे थे और उधर, कृष्ण चाल रहा था और शिवा सबसे बेहतर चाल चलनेवाला होता हैं।

‘‘ ये वे लोग है कि अपने घरो से बेकसुर निकाल दिए गए, उन्होने कुछ कुसूर नही किया। हां, ये कहते हैं कि हमारा सिर्फ शिवा हैं और अगर शिवा न हटाता तो नक्शे से हिन्दू स्थान का नाम ही मिट जाता , लोगो को एक-दूसरो से न हटाता रहता तो पूजा-घर मंदिर एक भी नहीं बचता और , और जो भक्त शिव के रास्ते , मदद करता करता हैं, शिवा उसकी जरूर मदद करता हैं। शिव शक्ति सबसे ज्यादा ताकतवाला और प्रभुत्वशाली हैं।’’

‘‘जिन शिव धर्म हिन्दूओं से बेकसुर लड़ार्इ की जाती है, उन्हे पुरी आजादी हैं कि वे भी लड़े , क्योकि उन पर जुल्म हो रहा हैं ओर शिव जी उन की मदद जरूर करेगा, वह यकीनन उनकी मदद पर विश्वास रखता है।
जो जुल्मी आप को बेघर कर रहे हैं ,
आप का धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं , चुप मत रहो , आवाज इतनी ऊँची रक्खो की शिव शक्ति काली दौडती चली आए।
आप के हाथ मे चन्डी की प्रचन्ड शक्ति हैं।
जिस के साथ महाकाल होते है वह मौत से भी टकरा जाते हैं।
हर हर महादेव

जँहा अधर्म को पाओं, कत्ल कर दो और जहां से उन्होने तुमको निकाला हैं वहां से तुम भी उनको निकाल दो।’
शिवा उन्ही लोगो के साथ तुमको दोस्ती करने से मना करता हैं, जिन्होने तुम से धर्म के बारे मे लड़ार्इ की और तुमको तुम्हारे घरो से निकाला और तुम्हारी निकालने मे औरो की मदद की, तो जो लोग ऐसों से दोस्ती करेंगे, वह भी जालिम ही होते हैं’
प्रेम शिव के लिए जो शिव रास्ते पर चलते है उन के लिए होता है।
शिव विरोधी के जुल्म के लिए दन्ड होता है।
यह तो कायरो की परिभाषा है कि असुरो से भी प्रेम करो।

शिव शक्ति शिव धर्म साधु , महात्मा बनने के साथ साथ वीर भी बनें। जैसे हनुमान जी, राम , शिव शक्ति, अन्याय के आगे सिर झुकाना कायरता है। शिव शक्ति कभी कायर हो ही नहीं सकते हैं। अपने आप को अपनी आत्मा शरीर को शिव शक्ति से जोड़ना , अपने परिवार को , दोस्तो को शिव शक्ति से जोड़ना ही, सच्चा धर्म ओर तपस्या है। शिव के बनाये नियमों पर आधारित चलना ही सच्चा धर्म है जो शिव द्वारा संचालित हैं। शिव धर्म दुनिया का पहला सच्चा धर्म है जो शिव शक्ति द्वारा उत्पन्न हुआ है। शिव ही सत्य है। सभी आत्मा देवी देवताओं सभी मानव जीवन जाति शिव लिंग शक्ति द्वारा पैदा होने के कारण शिव शक्ति की सन्तान ही है। परन्तु अलग अलग धर्म जाति ,रीति रिवाज , देश में अलग परिवेश मे पैदा होने के कारण , धर्म भ्रष्ट व्यवस्था के कारण अग्यान में डूबे हुए हैं। शिव शक्ति से जोड़ना ही सच्चा धर्म है। बिना शिव शक्ति के शव शरीर कुछ ज्यादा करने की स्थिति में नहीं होता है। इसलिए शिव शक्ति के द्वारा ही सम्पूर्ण विश्व का कल्याण संभव है।
शिव धर्म शिव स्थान
शिव धर्म गुलेरिया सद्गुगुरु

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