शिव प्रार्थना

दैनिक शिव प्रार्थना
यह सभी वेद शास्त्र पुराणों में स्पष्ट रूप से कहा जाता है कि जीवन का मूल उद्देश्य शिव तक पहुंचना है ताकि मोक्ष को पूजा करके प्राप्त किया जा सके जो आपको शिवशक्ति तक ले जाता है। दैनिक प्रार्थनाओं के माध्यम से सीधे शक्तिमान नवरात्रि

नवरात्रि को अच्छाईयों ओर पुन्यकार्यों एवं आशी्रवादों की बरसात ही कहा गया है। इन दिनों सभी शिवा हिन्दू पूजा व्रत (उपासना) ज्यादा करता है। अपने परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए उपासना के साथ, दान धर्म करता है।
यह दिन समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का ही है। इन दिनों में व्रत प्रार्थना कराने वाले के पाप गुनाह जल्द माफ हो जाते हैं।

लोगों की मदद करने का महीना है। ईमानदारी के साथ हम अपना जायजा लें कि क्या वाकई हम लोग मोहताजों लोगों की वैसी ही मदद करते हैं जैसी करनी चाहिए?
जब शिवा की राह में देने की बात आती है तो हमें कंजूसी नहीं करना चाहिए। शिवा की राह में खर्च करना ही दान है। ग़रीब चाहे वह अन्य धर्म के क्यों न हो, उनकी मदद करने की शिक्षा दी गयी है। दूसरों के काम आना भी एक पूजा ही समझी जाती है।
ग़रीबों की मदद, दोस्त में जो ज़रुरतमंद हैं उनकी मदद करना ज़रूरी समझा और माना जाता है।

कन्या पूजा करना पाप नष्ट करने का बहुत अच्छा कार्य है.
अपनी ज़रूरीयात को कम करना और दूसरों की ज़रूरीयात को पूरा करना अपने पापों को कम और अच्छाई को ज़्यादा कर देता है।

नवरात्रि के व्रत रखने से, उसके सब पिछले पापों माफ कर दिए जाएँगे। व्रत हमे अपने आप पर अपनी इन्द्रियो को काबू करने की ऐसी शक्ति देते है कि जिस से हम नये उत्साह से परेशानीयों का बहुत मजबूत हो कर सामना कर सकते है । हमारे अन्दर नयी ऊर्जा का संचार पैदा करते है। जो अन्दर के लोभ लालच पाप से दुर हटने की शक्ति उत्पन्न होती है, ओर हम शिवा के ओर निकट आ जाते है.
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shiva dharma

नवरात्रि

नवरात्रि को अच्छाईयों ओर पुन्यकार्यों एवं आशी्रवादों की बरसात ही कहा गया है। इन दिनों सभी शिवा हिन्दू पूजा व्रत (उपासना) ज्यादा करता है। अपने परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए उपासना के साथ, दान धर्म करता है।
यह दिन समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का ही है। इन दिनों में व्रत प्रार्थना कराने वाले के पाप गुनाह जल्द माफ हो जाते हैं।

लोगों की मदद करने का महीना है। ईमानदारी के साथ हम अपना जायजा लें कि क्या वाकई हम लोग मोहताजों लोगों की वैसी ही मदद करते हैं जैसी करनी चाहिए?
जब शिवा की राह में देने की बात आती है तो हमें कंजूसी नहीं करना चाहिए। शिवा की राह में खर्च करना ही दान है। ग़रीब चाहे वह अन्य धर्म के क्यों न हो, उनकी मदद करने की शिक्षा दी गयी है। दूसरों के काम आना भी एक पूजा ही समझी जाती है।
ग़रीबों की मदद, दोस्त में जो ज़रुरतमंद हैं उनकी मदद करना ज़रूरी समझा और माना जाता है।

कन्या पूजा करना पाप नष्ट करने का बहुत अच्छा कार्य है.
अपनी ज़रूरीयात को कम करना और दूसरों की ज़रूरीयात को पूरा करना अपने पापों को कम और अच्छाई को ज़्यादा कर देता है।

नवरात्रि के व्रत रखने से, उसके सब पिछले पापों माफ कर दिए जाएँगे। व्रत हमे अपने आप पर अपनी इन्द्रियो को काबू करने की ऐसी शक्ति देते है कि जिस से हम नये उत्साह से परेशानीयों का बहुत मजबूत हो कर सामना कर सकते है । हमारे अन्दर नयी ऊर्जा का संचार पैदा करते है। जो अन्दर के लोभ लालच पाप से दुर हटने की शक्ति उत्पन्न होती है, ओर हम शिवा के ओर निकट आ जाते है.
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shiva dharmaशिव जी के साथ संवाद कर सकता है। इसके अतिरिक्त, यह प्रार्थना पुजा व्यक्ति को बुरी आदतों और बुरे कर्मों से रोकती है। पवित्र शिव पुराण, उल्लेख करता है कि स्वर्ग की कुंजी दैनिक प्रार्थना दैनिक पूजा ही है।
शिव पूजा, एक शब्द, इस ग्रह पर प्रत्येक शिव हिंदू को दिव्य धागे सुत्र से बांधता है जो उन्हें सर्वोच्च शिव से जोड़ता है। यह शिव शक्ति को बेहतर तरीके से जोड़ने और जानने के लिए अपने भक्त को एक बुद्धिमान मार्ग प्रदान करता है। सभी हिंदू एक दिन में कम से कम दो बार प्रार्थना करते हैं क्योंकि यह अनिवार्य है। यदि आप प्रार्थना नहीं करते हैं, तो शिव शक्ति आपको न्याय के देव यमराज द्वारा जरूर दंडित करेगी।
सभी भक्तों के लिए विशेष अवसरों पर अन्य भक्तों के साथ शिव मंदिर में प्रार्थना की जानी चाहिए । उत्तर की दिशा में शिव कैलाश की तरफ मुख कर प्रार्थनाओं को कहा जाना चाहिए।
सुबह प्रार्थना करने के लिए एक बुलावा
शिव हिंदू समुदायों में, लोगों को प्रार्थना के लिए दैनिक बुलावा 🔔 द्वारा पूजा की याद दिलाई जाती है, मंदिर के नजदीक से हो सकती है।
प्रार्थना क्यो अनिवार्य है ?
कई पवित्र पुस्तकों में प्रार्थना का महत्व अच्छी तरह से प्रलेखित किया गया है।
कि हर हिंदू स्त्री पुरूष को दिन में 2 बार प्रार्थना की पेशकश की जाती है क्योंकि प्रार्थना से कोई छूट नहीं होती है। जो भी इस महत्वपूर्ण धार्मिक दायित्व को नहीं करता है वह शिव कानून तोड़ रहा है और उसे न्याय के दिन पर दंडित जरूर किया जाएगा।
पूजा से पहले सफाई
प्रार्थना करने से पहले, प्रार्थना करने से पहले हाथ, पैर, बाहों और पैरों को धोना अनिवार्य है। यह सफाई नकारात्मक प्रभाव को हटाती है और तंत्रिका तंत्र को आराम करने में मदद करती है और तनाव, तनाव और चिंता को आसान बनाती है।
2 प्रार्थना का लाभ
(सुबह की प्रार्थना)
इस प्रार्थना का समय सुबह की शुरुआत से शुरू होता है और सूर्य उदय तक रहता है।
प्रार्थना के लिए सुबह जल्दी उठना चुनौतीपूर्ण है। हालांकि, दिन की शुरुआत में प्रार्थना करते हुए, अपने दिन को हल्का करो। यह आपको सकारात्मक ऊर्जा और मार्गदर्शन देता है। शिव जी कहते हैं, कि जो भी प्रार्थना करता है वह निश्चित रूप से पूरे दिन शिव जी उसकी रक्षा करते है । वह पूरे दिन शिव सर्वशक्तिमान के संरक्षण और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए सुबह की प्रार्थना जरूर करने का प्रयास करें। सुबह की शुरुआत में, सभी भगवान देवी की सुपर ऊर्जा शिव सर्वशक्तिमान द्वारा शिव भक्त को देखने के लिए भेजी जाती है जो सुबह की प्रार्थना कर रहे हैं। इसलिए, सुबह प्रार्थना की पेशकश करना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह नरक से बचाता है।
यह प्रार्थना स्वर्ग के लिए भी दरवाजा खोलती है। इसलिए, इस समय अच्छे कर्म करना महत्वपूर्ण है।
यदि आप प्रार्थना करते हैं और न्याय के दिन नरक की आग से आपको बचाएंगे तो शिव सर्वशक्तिमान है सबसे ज्यादा महत्वपूर्णता उन का आशीर्वाद है।
आपके जीवन में किए गए किसी भी अन्य अच्छे कर्मों के लिए शायद आपको कोई इनाम मिलेगा या न मिले , परन्तु प्रार्थना पुजा का फल जरूर प्राप्त होता ही हैं।
आपको जीवन में सफलता के साथ-साथ इसके बाद भी, आपके स्वास्थ्य और परिवार के लिए प्रार्थना महत्वपूर्ण होगी। अपनी संपत्ति को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से प्रार्थना करना महत्वपूर्ण है।

2- (शाम की प्रार्थना) शाम की
प्रार्थना का प्रभाव आधी रात तक बना रहता है। यदि आप यह प्रार्थना करते हैं, तो शिव आपको इनाम देंगे। तो, सुनिश्चित करें कि आप शाम की प्रार्थनाओं को भी याद करना हैं। शिव शक्ति आपके प्रार्थना को जरूर सुनेंगे और आप पर आशीर्वाद की बारिश कर देंगे।
चूंकि यह दिन की आखिरी प्रार्थना है, यदि आप सोने से पहले अपनी प्रार्थना करते हैं, तो आपके पास अधिक शांतिपूर्ण रात है। शांतिपूर्ण नींद के लिए, नींद से पहले अपनी प्रार्थनाओं को पेश करना महत्वपूर्ण है।
हालांकि, इन 2 अनिवार्य प्रार्थनाओं के साथ अन्य हिंदू प्रार्थना भी हैं। वो हैं:
प्रार्थना की आध्यात्मिक, धार्मिक, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, आर्थिक, सामाजिक, आदि जैसे कई फायदे हैं। आपके दिमाग और आत्मा को आराम देगी। योगिक दर्शन के अनुसार सभी सात चक्रों को सक्रिय करना बेहद फायदेमंद है। यह शरीर की मांसपेशियों और रक्त परिसंचरण के लिए बेहद फायदेमंद है।
एक दिन में 2 बार प्रार्थना करना धर्म के सबसे महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। हालांकि, कभी-कभी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं जहां प्रार्थना समय पर नही किया जा सकता है। परंपरा निर्देश देती है कि हिंदू को किसी भी याद करने के बाद जितनी जल्दी हो सके अपनी छुटी प्रार्थना पुरी कर लेनी चाहिए।
मैंने पूजा और इसके अर्थ के बारे में सारी जानकारी का सहयोग करने का प्रयास किया। यदि आप सुधार का सुझाव देना चाहते हैं तो कृपया नीचे दी गई टिप्पणियों में मुझे बताएं।
पूजा का मुख्य उद्देश्य शिव भगवान के साथ एकरूप होकर सभी को अपने साथ जोड कर सभी के अन्दर शिव रूपी प्रकाश ऊर्जा का संचार और एक रूप एक जुट होकर कार्य करना है। “शुरूआत ” का जिक्र करते हुए, शिव पुराण का पहला मंत्र,
ओम नमः शिवाय
जैसा कि दैनिक पूजा में आवश्यक है, भक्त भगवान के सामने खड़े हो सकते हैं, धन्यवाद और उसकी प्रशंसा कर सकते हैं और “सीधे पथ” के साथ मार्गदर्शन मांग सकते हैं।
इसके अलावा, दैनिक पूजा हिंदू को भगवान के आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देने के लिए याद करे और भगवान को प्रस्तुत करने से अन्य सभी चिंताओं पर प्राथमिकता होती है, जिससे शिव जी के चारों ओर ऊर्जा धुम रही है , जैसे शिव जी के चारो तरफ देव गण घूमते है , अपने जीवन को शिव जी की इच्छा के सामने रक्खे हैं। पूजा भी भगवान को याद करने की औपचारिक विधि के रूप में कार्य करती है।
सभी हिंदू का मानना है कि भगवान के सभी भगवान देवी ने केवल शिव को दैनिक प्रार्थना कर के ही शक्तिशाली हुए है, और भगवान शिव के साथ एकता को प्रस्तुत करने में विनम्र थे। शिव हिंदू भी मानते हैं कि सभी गुरु और ब्राह्मणों का मुख्य कर्तव्य मानव जाति को नम्रतापूर्वक भगवान शिव की एकता के लिए प्रस्तुत करना ही सिखाता है।
सभी पवित्र पुस्तकों में, यह लिखा गया है कि: “क्योंकि, विश्वास करने वाले लोग हैं, जब भगवान का उल्लेख किया जाता है, उनके दिल में प्रेम से भर उठते हैं, और जब वे शिव जी के संकेतों को सुनते हैं, तो उनके विश्वास को मजबूत करते हैं, और अपने विश्वास को मजबूत करते हैं .
“जिनके दिल, जब भगवान का उल्लेख किया गया है, वे भय से भरे हुए हैं, जो अपने दुःखों पर धीरज रखते हैं, नियमित प्रार्थना करते रहते हैं, और जो हमने उन्हें दिया है उससे बाहर शिव जी के कार्य पर (दान में) भी खर्च करते हैं।”
HAR HAR MAHADEV

शिव

– शिव के बिना शव बन जाए गा ,
बिना शिव शक्ति, बकरीयों का झुंड बन जाए गा, जो चाहे गा हांक ले जाए गा। जिन का धर्म शिव शक्ति नहीं है ,उस का कुछ नहीं हो सकता है। शिव ही सम्पूर्ण विश्व के देवों के देव महादेव हैं। असली धर्म वह जो शिव द्वारा उत्पन्न संगठन संचालित होता है। शक्ति लिगं द्वारा ही संसार विश्व की रचना और सभी आत्माओ का जन्म हुआ है, संस्कृति धर्म शिव शक्ति से प्रकट होता है ओर में में लोप हो जाते हैं। पहला सच्चा बीज है धर्म जो शिव द्वारा आधार चक्र आत्मा में उत्पन्न होता है।

शिवा प्रकाश

शिव अमृत की रोशनी जो मुश्किल से मुश्किल वक्त में इंसान के दिल को आराम और शांति प्रदान करता है

प्रार्थना को इस लिए बिल्कुल ठीक कहा गया है कि ताकि इंसान साफ सुथरा हो कर पूजा प्राथना के द्वारा शिवा के क़रीब हो जा जाऐ।

प्रार्थना इन्सान के पापों को नष्ट कर देती है

प्रार्थना द्वारा कारोबार मे बढ़ोतरी

प्रार्थना द्वारा शिवा को याद करें और उन का धन्यवाद करे , और इस प्रार्थना के द्वारा शिवा को याद करें ताकि ,कोई भुल ना हो सकें और इस शिवा के बारे कोई कुतर्क कर पाप के भागीदार न बने .

शिवा प्रार्थना के लिये खुशी के साथ खड़ा होना है। पाप मुक्त होना ही है.

प्रार्थना ही है कि इंसान हमेशा शिवा की याद में रहे और उसे किसी भी हाल मे कभी न भूले , मना ना करे।

इस के इलावा इंसान प्रार्थना के द्वारा हमेशा और हरवक्त़ शिवा के सामने में उपस्थिति रहे और उसकी याद से ही आन्नद मे रह सकता है । प्रतेक दिन की प्रार्थना ही हमे अपराधों से रोकती है और बुराईयों को दूर करती है ,

अंहकार ,पाप और को दूर करती है और शिवा की याद में रहने ही से, पापों से दूर हटना ही होता है.

शिवा का कर्ज

दूसरों का प्यार और अच्छाई का एहसान का धन्यवाद करना ही चाहिए .

अच्छाई जितनी ज़्यादा हो और अच्छाई करने वाले का धन्यवाद भी इतना ही ज़्यादा और अच्छा होना चाहिए। क्या शिवा से ज़्यादा कोई और हमारे ऊपर अधिकार रखता है ? नहीं न। इस लिए कि उन के अाश्रिवाद हमारे ऊपर बहुत ही ज्यादा हैं और एक मात्र शिवा ही है जिन्होंने ने खुद जहर पी कर अपने आप को मिटा ही दिया था.

एक शिवा जी ने किया और वो सब चीजों भी हमे दी जो ज़िंदगी जीने के लिये जरुरी है जैसे, सुर्य की रोशनी जो शिव द्वारा ही प्रकट है , आकाश, पृथ्वी, हवा, पानी, मकान, पुरी सृष्टि, शरीर, प्यार, वृक्ष,

देवी देवताओं को भेजा, अच्छे बुरे मे फर्क करना सिखाया

बडी मंज़िल को प्राप्त करने के लिये साहस उत्पन्न किया । शिवा शक्ति से ज़्यादा किस ने हमारे साथ अच्छाई और एहसान किया है कि इस से ज़्यादा कोई कर ही नही सकता है।

हमारे लिये तो धन्यवाद करना भी छोटा लफ्ज है

यह हम उस शिवा की इन सब अच्छाई का धन्यवाद करें और उन अच्छाईयों के लिये धन्यवाद में उसकी प्रार्थना पुजा करें।

चूँकि वो हमारा मालिक है, इसलिए हम भी सिर्फ उसी की प्रार्थना करें और सिर्फ इसी के बने रहें और झूठ के ग़ुलाम ना बनें। प्रार्थना शिवा के लिए धन्यवाद है और विश्वास को मजबूत करता है। जिस से आत्मा का विकास होता है, जिन की आत्मा विकसित होती है उन का देश समाज भी विकसित होता ही है.

नवरात्रि

नवरात्रि को अच्छाईयों ओर पुन्यकार्यों एवं आशी्रवादों की बरसात ही कहा गया है। इन दिनों सभी शिवा हिन्दू पूजा व्रत (उपासना) ज्यादा करता है। अपने परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए उपासना के साथ, दान धर्म करता है।
यह दिन समाज के गरीब और जरूरतमंद बंदों के साथ हमदर्दी का ही है। इन दिनों में व्रत प्रार्थना कराने वाले के पाप गुनाह जल्द माफ हो जाते हैं।

लोगों की मदद करने का महीना है। ईमानदारी के साथ हम अपना जायजा लें कि क्या वाकई हम लोग मोहताजों लोगों की वैसी ही मदद करते हैं जैसी करनी चाहिए?
जब शिवा की राह में देने की बात आती है तो हमें कंजूसी नहीं करना चाहिए। शिवा की राह में खर्च करना ही दान है। ग़रीब चाहे वह अन्य धर्म के क्यों न हो, उनकी मदद करने की शिक्षा दी गयी है। दूसरों के काम आना भी एक पूजा ही समझी जाती है।
ग़रीबों की मदद, दोस्त में जो ज़रुरतमंद हैं उनकी मदद करना ज़रूरी समझा और माना जाता है।

कन्या पूजा करना पाप नष्ट करने का बहुत अच्छा कार्य है.
अपनी ज़रूरीयात को कम करना और दूसरों की ज़रूरीयात को पूरा करना अपने पापों को कम और अच्छाई को ज़्यादा कर देता है।

नवरात्रि के व्रत रखने से, उसके सब पिछले पापों माफ कर दिए जाएँगे। व्रत हमे अपने आप पर अपनी इन्द्रियो को काबू करने की ऐसी शक्ति देते है कि जिस से हम नये उत्साह से परेशानीयों का बहुत मजबूत हो कर सामना कर सकते है । हमारे अन्दर नयी ऊर्जा का संचार पैदा करते है। जो अन्दर के लोभ लालच पाप से दुर हटने की शक्ति उत्पन्न होती है, ओर हम शिवा के ओर निकट आ जाते है.
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